म्यूच्यूअल फंड में इन्वेस्ट करने से पहले देखे ऐसी गलतियां | Top Mutual Fund Mistakes

म्यूच्यूअल फंड में इन्वेस्ट करने से पहले देखे ऐसी गलतियां | Top Mutual Fund Mistakes

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हम साल में कई इन्वेस्टमेंट करते हैं लेकिन इन्वेस्टमेंट के दौरान हमें कुछ गलतियों से बचना चाहिए आज हम वही जानेंगे

सबसे पहले एसआईपी के बारे में जानते हैं एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) हम हर महीने systematic Investment करना चाहते हैं तो डिसाइड कर सकते हो कितना इन्वेस्टमेंट करना वह आपकी मंथली सैलरी का डिवाइड हो जाता है और जो लॉन्ग टर्म में रखना चाहते हो उसे म्यूचुअल फंड के इक्विटी में एसआईपी की तरह रख सकते हो.

एसआईपी किसे करनी चाहिए ?

जिन लोगों की फिक्स्ड इनकम होती है उन्हें पता होता है मंथली बिल्स कितने देने हैं उनके खर्चे कितने आएंगे वह एसआईपी सेट कर सकते हैं।

कोई भी मार्केट कंडीशन हो चाहे मार्केट डाउन जा रहा हो, मार्केट ऊपर जा रहा हो आपको एसआईपी बंद नहीं करनी चाहिए । एसआईपी बंद कर दोगे तो आप फ्यूचर रिटर्न्स को हैंपर कर रहे हो इसीलिए एसआईपी को कंटिन्यू रखना चाहिए मिनिमम 10 से 15 साल तक।

अगर अचानक से आपके पास बहुत सारा पैसा आ जाए तो उसे lumpsum में इन्वेस्ट करना चाहिए जिनका बिजनेस है वह lumpsum में इन्वेस्ट कर सकता है या किसी के पास अचानक बोनस मिल जाए तो बिना सोचे समझे लम सम कर देना चाहिए टाइमिंग द मार्केट रखने से अच्छा टाइम इन द मार्केट रखना चाहिए ।

अगर आप म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्टमेंट करने के लिए जाते हैं तो एजेंट के पास जाते हैं बैंक के पास जाते हैं ये आपको रेगुलर प्लान बेचते हैं डायरेक्ट नहीं अगर आप किसी वेबसाइट पर जाओगे तो वह भी आपको रेगुलर प्लान ही बेचेंगे।
रेगुलर प्लान में आपको 1% Expance ratio pay करना पड़ता है अगर डायरेक्ट लेते हैं तो लॉन्ग में फायदा हो सकता है यह एक 1% करोड़ों का बन जाता है। आपको करोड़ों का नुकसान करवा सकता है इसीलिए डायरेक्ट प्लान ही लेना चाहिए।

आपने डायरेक्ट प्लान ले लिया उसके बाद डिविडेंड का प्लान चूस नहीं करना है आपको मंथली, क्वार्टरली डिविडेंड दे देंगे लेकिन re investment में ये वापस से इनवेस्ट कर देते हैं । डिविडेंड क्योंकि म्यूचुअल फंड में exit load लगता है तो reinvestment में devidend में exit load लगेगा।
इससे अच्छा आप grow plan choose कर सकते हैं यह ऑटोमेटिक इनवेस्ट करते जाते है अलग से exit लोड नहीं लगेगा लॉन्ग टर्म के लिए grow प्लान ही choose करें.

अब म्यूचल फंड लेया ईटीएफ है?

अगर आप ईटीएफ लेते हैं तो एक्सपेंस ratio कम होता है म्यूचुअल फंड के comparison में. ईटीएफ में इन्वेस्ट करने के लिए एक डीमैट अकाउंट की जरूरत होती है मतलब उसके और मेंटेनेंस चार्जेस बहुत सारे pay करने पड़ेंगे अगर आप स्टॉक में इन्वेस्ट करते हो तो इटीएफ में इन्वेस्ट कर सकते हैं अगर आप स्टॉक्स में इन्वेस्ट नहीं करते हो तो आपको म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करना चाहिए अगर आप ज्यादा इन्वेस्ट करते हो तो ईटीएफ में तो थोड़ा लिक्विडिटी का issue आ सकता है तो आप म्यूच्यूअल फंड को चूस कर ले।