क्या कहती है Hindenburg Research की रिपोर्ट ? | अडानी ग्रुप ने क्या जवाब दिया?​

क्या कहती है Hindenburg Research की रिपोर्ट ? | अडानी ग्रुप ने क्या जवाब दिया?​

अमेरिका की रिसर्च फर्म Hindenburg Research उसने एक रिर्पोट प्रकाशित की हैं. जिसमें कहां गया हैं गौतम अडानी की सारी कंपनियां अंदर से खोखली है और उन कम्पनियों की बैलेंस शीट में हेराफेरी करके बहुत बड़ा स्कैम किया है.

भारत की अलग-अलग वित्तीय संस्थाओं ने अडानी ग्रुप कि अपनी जांच शुरू कर दी है.

आरबीआई (RBI) ने एक नोटिस जारी किया है उस नोटिस में सभी बैंकों से पूछा है बैंकों ने अडानी ग्रुप की कौनसी कंपनी को कितना लोन दिया हैऔर कितने साल के लिए लोन दिया हैं. RBI के अलावा प्राइवेट बैंक City बैंक ने भी ये ऐलान किया हैं उसकी तरफ से अडानी ग्रुप की किसी भी कंपनी को लोन नहीं दिया जाएगा. सिटी बैंक में तत्काल लोन देने पर रोक लगा दी है.
स्विट्जरलैंड के बड़े बैंक credit Suisse ने भी अडानी ग्रुप से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों पर रोक लगा दि हैं.

क्या कहती है Hindenburg Research की रिपोर्ट ?

वर्ष 2017 में इस कंपनी की स्थापना हुई थी. इसका कहना है 2 वर्ष से अडानी की कंपनियों की अकाउंट रिपोर्ट की स्टडी की है. उसके बाद 106 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की गई. जिसमें अडानी ग्रुप से 88 सवाल पूछे गए और अडानी कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल उठाए गए. किसी कंपनी को चलाने की प्रक्रिया को कॉरपोरेट गवर्नेंस कहते हैं. अडानी ग्रुप पर छह गंभीर आरोप लगाए हैं.

अडानी ग्रुप पर लगे गंभीर आरोप क्या है?

1.Stock Manipulation

शेयर्स में हेराफेरी का आरोप है शेयर्स ओवरवैल्यूड बिक रहा है. शेयर overvalued कब होता है?
जब बाजार में डिमांड ज्यादा होती है और सप्लाई कम होती हैं. रिपोर्ट में लिखा है कंपनियों में 17 लाख 80 हज़ार करोड रुपए का स्टॉक मैनिपुलेशन हुआ है.
गौतम अडानी की नेटवर्थ ढाई साल में 13 गुना तक बढ़ी हैं. जिस तरीके से शेयर्स की प्राइस बढ़ाई है गौतम अडानी की नेटवर्थ भी तेजी से ऊपर की तरफ गई और यह सब गैरकानूनी तरीके से हुआ है. ये सब रिर्पोट में बताया गया हैं.

2. तीन साल में कंपनियों के शेयर में 819% की वृद्धि हुई है. कंपनियां भारी कर्जों में डूबी हुई है फिर 3 साल में वृद्धि कैसे हुई? ये सवाल पूछा गया हैं.
अडानी
•अदानी ग्रुप पर आरोप है टैक्स Haven देशों में शेल कंपनियां बनाई. Tax Haven देश उसे कहा जाता है जहां कंपनियों को यह नहीं बताना पड़ता है उसके बैंक अकाउंट में पैसा कहां से और कौनसे देश से आ रहा है. इन देशों में कंपनियों से ज्यादा टैक्स नहीं वसूला जाता है और कई बार टैक्स फ्री कर दिया जाता है.

•शेल कंपनियां सिर्फ कागजों पर होती है पैसे के हेरफेर के लिए बनाई जाती है. अडानी की फैमिली मेंबर्स पर आरोप है Mauritius, UAE और Caribbean देशों में शेल कंपनियां बनाई गई.

•गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी के नाम Mauritius में 38 शेल कंपनियां हैं और उनके रिश्तेदारों के नाम भी हैं.
•भारत और दूसरे देश से अडानी ग्रुप जो केपिटल earn करता है उन पैसों को इन Tax Haven कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया जाता है. इस फंड से वॉश ट्रेडिंग (Wash Trading) होती है.

वॉश ट्रेडिंग क्या है? (What is Wash Trading?)

जब शैल कंपनी अवैध तरीके से शेयर को खरीदती है और बेच देती है उसे वॉश ट्रेडिंग कहते हैं. ताकि ट्रेडिंग वॉल्यूम high रहे. इससे बाजार में संदेश जाता है उस शेयर की बाजार में बहुत डिमांड है ताकि शेयर खरीदते रहे और बेचते रहे.

3. कंपनियों में प्रमोटर्स के शेयर्स बहुत High है. जिससे कंपनी के निवेशको को नुकसान हो सकता है.

Hindenburg रिर्पोट में कहा अडानी टोटल गैस में प्रमोटर्स की 74.8% की हिस्सेदारी है जबकि अडानी एंटरप्राइजेज में प्रमोटर्स की 73.64% की हिस्सेदारी हैं.

4. अडानी की 7 में से 5 लिस्टेड कंपनियां ऐसी है जिसका Current Ratio 1 से भी कम है. यानी पांच कंपनियों का current Assets current Liabilities से कम है.

•टोटल करेंट एसेट्स (Total Current Assets)

कितना कैश, बैंक बेलेंस, स्टॉक्स है

•टोटल करेंट लायबिलिटी (Total Current Liabilities)

कितना पैसा, सप्लायर्स, स्टाफ, दूसरे खर्च में देना हैं

• पांच कंपनियों पर 1 लाख 62 हजार करोड़ का कर्जा है.

5. SEBI की जांच में 1700 करोड़ की हेराफेरी के आरोप लगे.

6. अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी टोटल गैस के ऑडिट बहुत छोटी कंपनियों से कराए गए हैं, अनुभव हीन कंपनिया हैं. इन कम्पनियों की अपनी वेबसाइट तक नहीं है.

hindenburg report adani group

अडानी ग्रुप ने क्या जवाब दिया?

अडानी ग्रुप के सीएफओ जगेशिंदर सिंह ने कहा हम हैरान हैं कि हिंडेनबर्ग ने जो रिपोर्ट छापी है उसके बारे में हमसे ना तो कुछ पूछा गया और न ही तथ्य जाने गए. यह रिपोर्ट पूरी तरह से गलत जानकारी पर आधारित है और इसमें जो आरोप लगाए गए हैं वो भी निराधार है. जिसे भारत की अदालत खारिज कर चुकी है.

•अडानी ग्रुप के जवाब की 400 पन्ने की रिपोर्ट में स्टॉक्स की हेराफेरी के आरोप को निराधार बताया है.
•हिंडेनबर्ग ने जो रिपोर्ट में बताया अडानी ग्रुप पहले ही वर्ष 2015 में उन आंकड़ों को बता चुका है.
•अडानी ग्रुप की लिस्टेड 9 कंपनियों में से 8 कंपनियों की ऑडिटिंग 6 बड़े ऑडिटर्स करते हैं.
•ये आरोप गलत बताया है अडानी ग्रुप के प्रमोटर्स ने शेयर्स को गिरवी रखकर कर्ज लिया हैं.
•कंपनियों की बैलेंस शीट में कोई गड़बड़ नहीं की गई है.

अडानी ग्रुप ने कहां है यह हमला उन पर नहीं भारत पर हो रहा है. यह हमला स्वदेशी कंपनी पर हो रहा है. इसमें भारत की अखंडता, ग्रोथ को निशाना बनाने की कोशिश हुई है. अडानी ग्रुप भारत पर होने वाला हमला बता रहा है.

अमीरों की लिस्ट में अडानी की रैंकिंग?

23 जनवरी को अडानी की रैंकिंग नंबर 3 पर थी और 24 जनवरी को रिपोर्ट के बाद 2 फरवरी को अडानी की रैंकिंग 16वे नंबर पर आ गई.

अडानी ने FPO वापस लिया?

अडानी ग्रुप 20 हज़ार करोड का FPO लाने वाला था. यह FPO मंजूर हो चुका था और लोगों ने सब्सक्राइब भी कर लिया था. लोगों ने शेयर्स पहले से ही खरीद लिए थे और अडानी ग्रुप के पास 20 हज़ार करोड आ गए थे. लेकिन आखरी स्टेज पर आकर अडानी ने FPO को वापस ले लिया था. अब वह 20 हज़ार करोड निवेशको को लौटा देंगे वह नहीं चाहते की निवेशको का पैसा डूबे या कम हो और उन्होंने कहा वह ये नैतिकता के आधार पर कर रहे है.